एकटा छथि,माँ जगजननी महाकाली !सभक रक्षनार्थ,दुखिया के दुःखहारिणीपालनकारिणि महागौड़ीके नहि जनैछ हिनक महिमा..माँ जगदम्बा !तें की ?ओहो त स्त्रिये छथि ..ओ त भवभंजनि महाकालिका थिकीहहम सभ हुनका अबला कहबनि !नहि ने ?हुनक जीबन कि अकंटक छलन्हि ?साक्षात् रणचण्डी। !त की ?हम सभ सदति ..
कथमपि नहिं .आख्यान ब्याख्यान भरल परल अछि ,पूजा अर्चना क संग ...हुनक कंटकमय गाथा सँ ..जीबन जिबाक प्रेरणा लैत छी ।हुनक कंटकमय गाथाक ...श्रवण मनन करैत छी ।तअ कहू त कियेक नहि ..हुनकहि सँ ..एहि बातक बिचार केने बिनाकियेक कनियों दुःख सँ ..अति दुःखी भए ...अपन आराध्या क आगू ...गिरगिराइत रहैत छी ,जे ओ अपराजिता ..महाकाली माएकतेक द्रवित हेतीह ..हमर सभक अकर्मण्यता पर ,तअ आऊ ..कतेक क्षुब्ध हेतीह ,पूजा उपासना कहम सभ मिलि प्रण करीजानबा , बुझबाक ...
अनर्गल अर्थ जानि ,पूजा उपासना क सही अर्थ
Maithili Sahasin Mahasabha
मंगलवार, 26 सितंबर 2017
उपासना
गुरुवार, 21 सितंबर 2017
कलशस्थापन
शुभ संकल्पक कलशस्थापन !
तन केर घट मे ज्ञानक जल दय , उत्कर्षक अभिनव पल्लव दय ,
विजयक जव केँ कर्म वालुका ,धी विद्या संग मे आरोपण |
शुभ संकल्पक कलशस्थापन ||
सदाचार केर द्रव्य समर्पित ,शुभ विचार के फल कय अर्पित ,
लालित्यक हो वस्त्र आवरण ,एकताक माला हो गुम्फन |
शुभ संकल्पक कलशस्थापन ||
सुभग मन्त्र कर्मक उत्प्रेरण ,प्राणी केर प्रकाशमय जीवन ,
सुख संतोष प्राप्त हो अनुखन ,दीपक ज्योति विकास किरण |
शुभ संकल्पक कलशस्थापन ||
करुणा कृपा आ त्याग भावना ,अपना लय अत्यल्प कामना ,
पर सुख जनहित केर कल्पना ,अनुरागक हो भाव प्रदर्शन |
शुभ संकल्पक कलशस्थापन ||
ममतामयि माताक मूर्ति हो ,सुभग याचना केर पूर्ति हो,
जीवन रण विजयक स्फूर्ति हो ,मंगल मोदक शरण वरण |
शुभ संकल्पक कलशस्थापन ||
मानस उपजय हीन भाव नहि,अशुभ अमंगल केर प्रभाव नहि,
सत्य अहिंसा सँ दुराव नहि ,शक्ति युक्तिमय मानव जीवन |
शुभ संकल्पक कलशस्थापन ||
स्वाहा भ्रष्टाचार हवन कए, नारी मातृस्वरूप नमन कए ,
करू स्तवन शक्तिक मधुकर ,आत्मभाव जीवक प्रतिपालन |
शुभ संकल्पक कलशस्थापन ||
*******************मधुकर **************
तन केर घट मे ज्ञानक जल दय , उत्कर्षक अभिनव पल्लव दय ,
विजयक जव केँ कर्म वालुका ,धी विद्या संग मे आरोपण |
शुभ संकल्पक कलशस्थापन ||
सदाचार केर द्रव्य समर्पित ,शुभ विचार के फल कय अर्पित ,
लालित्यक हो वस्त्र आवरण ,एकताक माला हो गुम्फन |
शुभ संकल्पक कलशस्थापन ||
सुभग मन्त्र कर्मक उत्प्रेरण ,प्राणी केर प्रकाशमय जीवन ,
सुख संतोष प्राप्त हो अनुखन ,दीपक ज्योति विकास किरण |
शुभ संकल्पक कलशस्थापन ||
करुणा कृपा आ त्याग भावना ,अपना लय अत्यल्प कामना ,
पर सुख जनहित केर कल्पना ,अनुरागक हो भाव प्रदर्शन |
शुभ संकल्पक कलशस्थापन ||
ममतामयि माताक मूर्ति हो ,सुभग याचना केर पूर्ति हो,
जीवन रण विजयक स्फूर्ति हो ,मंगल मोदक शरण वरण |
शुभ संकल्पक कलशस्थापन ||
मानस उपजय हीन भाव नहि,अशुभ अमंगल केर प्रभाव नहि,
सत्य अहिंसा सँ दुराव नहि ,शक्ति युक्तिमय मानव जीवन |
शुभ संकल्पक कलशस्थापन ||
स्वाहा भ्रष्टाचार हवन कए, नारी मातृस्वरूप नमन कए ,
करू स्तवन शक्तिक मधुकर ,आत्मभाव जीवक प्रतिपालन |
शुभ संकल्पक कलशस्थापन ||
*******************मधुकर **************
सोमवार, 11 सितंबर 2017
देव्यपराधक्षमापन स्तोत्रम् क छायानुवाद
मन्त्र ने जानी तन्त्र ने जानी ,नहि स्तुति करबा के ज्ञान ,
नहि जानी हम करब आवाहन ,नहि अवगति करबा के ध्यान |
हम अहाँक स्तोत्र कथा सँ, मातु सर्वथा छी अनजान ;
नहि मुद्रा सँ हमरा परिचय , केवल करब विलापक ज्ञान |
हम तँ बात एकेटा जानी , ग्रहण जे जननी करय शरण |
माँ जगदम्वे चरण शरण ||
कल्याणी उद्धार कारिणी ,नहि विधान पूजा धारण |
,धनक अभाव स्वभाव आलसी ,कएल ने पाठक सम्पादन |
त्रुटि भेल चरणक सेवा मे ,क्षमा करब हे जग जननी !
पूत कपूत बनब सम्भव अछि ,मात कुमाता नहि केहुखन ?
माँ जगदम्वे चरण शरण ||
पुत्र अहाँके सरल स्वभावक ,पृथ्वी पर बहुतो जग जननी !
हम छी चपल स्वभावक चंचल ,विरल पुत्र हम छी अवणी,
किन्तु त्याग नहि हमर उचित अछि ,नहि जानी एहि केर कारण ?
पूत कपूत बनब सम्भव अछि ,मात कुमाता नहि केहुखन |
माँ जगदम्वे !चरण शरण ||
चरणक सेवा कएल ने कहियो ,नहि धन केलहुँ हम अर्पण ,
स्नेह अहाँ के तद्यपि अनुपम, हम जानी एहि के कारण ,
पुत्र अधम पर स्नेह ममत्वक ,अहाँ कएल निश्चय धारण ,
पूत कपूत बनब सम्भव अछि ,मात कुमाता नहि केहुखन |
माँ जगदम्वे चरण शरण ||
मातु पार्वती हम तँ केलहुँ ,अछि माँ अनेक देवक सेवन ,
वर्ष पचासी आब ने सम्भव ,हमरा सँ सबहक पूजन ?
रहल आश नहि हमरा ककरो, तेँ धेलहुँ अछि अहँक शरण ,
अहूँ कृपा नहि करब हे अम्वे! तँ जाएब पुनि ककर शरण ?
माँ जगदम्वे चरण शरण ||
अहँक मन्त्र केर एको अक्षर ,अधम सँ अधमक कान समाय ,
तँ चांडालो केर मुख निकसय ,वाणी मधुरक उच्चारण ,
दीनो पाबि लैत अछि वैभव ,मंत्राक्षर जे करय श्रवण ,
जप तप अहँक करय विधि पूर्वक ,गति मति प्राप्त विलक्षण |
माँ जगदम्वे चरण शरण ||
अंग लपेटल चिता भस्म छन्हि ,विषम हलाहल अछि भोजन ,
नग्न दिगम्बर माथ जटा छन्हि ,कंठ वासुकी आभूषण ,
भिक्षा पात्र कपाल हाथ मे, जगदीशक पदवी धारण ,
ई महत्व शिव केँ अछि भेटल , अहींक पाणिग्रहणक कारण |
माँ जगदम्वे चरण शरण ||
चन्द्रमुखी हम सत्य कहै छी ,नहि हमरा मोक्षक ईच्छा ,
नहि अभिलाषा आब जगत मे,प्राप्त करी हम वैभव धन ,
नहि विज्ञानक ज्ञान अपेक्षा , नहि सुख भोगक आकांक्षा ,
हमर याचना मातु एकेटा ,नाम जपैत रही जीवन |
माँ जगदम्वे चरण शरण ||
माँ श्यामा हम विधि पूर्वक नहि ,कएल अहाँ के आराधन ,
हम केलहुँ अपराध अनेको , हृदय कठोर भाव चिन्तन ,
किंचित कृपा दृष्टि हमरा पर, प्राप्त अहाँ के अवलम्वन,
दयामयी ई अहींक योग्य अछि ,अपन कुपुत्रो देब शरण |
माँ जगदम्वे चरण शरण ||
हे महेश्वरी ! करुणा सागर ,आफद फँसि केलहुँ सुमिरण ,
शठता हमर क्षमा करु जननी , नहि केलहुँ पद के सेवन ,
ब्यर्थ गमाएल काल स्मरण ,केलहुँ नहि हम भरि जीवन ,
भूखल प्यासें पीड़ीत बालक करय मात्र माएक सुमिरन |
माँ जगदम्वे चरण शरण ||
तद्यपि कृपा अहाँ के पाबी ,नहि कोनो आश्चर्यक बात ?
पुत्र करय अपराध घनेरो ,तदपि उपेक्षा करथि ने मात ,
हमर समान पातकी जग नहि ,पाप हारिणी नहि अहाँ सन ,
उचित बुझी से करी हे अम्वे ! हम मधुकर छी मातृ शरण |
माँ जगदम्वे ! चरण शरण ||
*****************मधुकर **************************
शुक्रवार, 1 सितंबर 2017
बिना
डेग झारि नहि चलब बाट मे ठेसो लगनेँ |
पैर वारि नहि धरब मार्ग मे काँटो गरनेँ |
आबो नहि सम्हरब दुश्मन के वैभव हरणेँ |
आनक उन्नति देखि कोनो फल नहि हो जरनेँ |
युक्ति बिना नहि कार्य सिद्ध कतबो श्रम कएनेँ |
प्राप्त सफलता नहि हो , लगन धैर्य बिनु धएनेँ |
पेट भरय नहि रस लागल आँगुर केँ चटनेँ |
भेटय शान्ति संतोष बाँटि केँ हिस्सा खेनेँ |
मोजर भेटय ने गौरव गीत अपन मुँह गेनेँ |
सुनियों केँ अन्ठाबय, हरदम गाल बजेनेँ |
बिनु साहस के युद्ध विजय नहि खड्ग पिजेनेँ |
चौर बनय नहि भात पैन बिनु आगि सिझेनेँ |
सहन शक्ति नहि बिना क्रोध के आगि मिझेनेँ |
प्रेम होए नहि बात बिचार सँ बिना रिझेनेँ |
नहि श्रद्धा विश्वास बिना आत्मा सुनझेनेँ ||
************************मधुकर *************
01/09/2017
गुरुवार, 31 अगस्त 2017
मुनब आँखि जगत अन्हारे
मुनब आँखि जगत अन्हारे , चिन्हत लोक अँहक व्यवहारे |
मति गति हो आहार विहारे , कीर्ति करब जानत संसारे |
दोषी अनुचित कए ब्यापारे , सत्कर्मी केर सुयश अपारे |
प्रिय लगैत अछि सुखद बिचारे , नाङट रहब देखत संसारे |
घृणा पाएब मानसिक विकारे , जोश होश आबय ललकारे |
मान भेटत कए जन सत्कारे , किछुओ टिकय ने बिनु आधारे |
होए ने प्रतिक्रिया बिना प्रहारे , जिह्वा स्वाद ने बिनु चटकारे |
नेना रीझय ने बिना दुलारे , थेथर हटय ने बिनु दुत्कारे ||
खुशामदो नहि बिनु दरकारे , आमद प्राप्त हो कोनो प्रकारे |
सिद्ध दोष नहि बिनु स्वीकारे , भेटय प्रमाण तँ बंद वकारे ||
बुद्धिक बल बल सकल पछारे , छुरी बुधियार दूनू दिस धारे |
सभ दिन माथा पापक भारे , मधुकर अंतमे हरे मुरारे!
****************************************मधुकर ************
31/08/2017
मति गति हो आहार विहारे , कीर्ति करब जानत संसारे |
दोषी अनुचित कए ब्यापारे , सत्कर्मी केर सुयश अपारे |
प्रिय लगैत अछि सुखद बिचारे , नाङट रहब देखत संसारे |
घृणा पाएब मानसिक विकारे , जोश होश आबय ललकारे |
मान भेटत कए जन सत्कारे , किछुओ टिकय ने बिनु आधारे |
होए ने प्रतिक्रिया बिना प्रहारे , जिह्वा स्वाद ने बिनु चटकारे |
नेना रीझय ने बिना दुलारे , थेथर हटय ने बिनु दुत्कारे ||
खुशामदो नहि बिनु दरकारे , आमद प्राप्त हो कोनो प्रकारे |
सिद्ध दोष नहि बिनु स्वीकारे , भेटय प्रमाण तँ बंद वकारे ||
बुद्धिक बल बल सकल पछारे , छुरी बुधियार दूनू दिस धारे |
सभ दिन माथा पापक भारे , मधुकर अंतमे हरे मुरारे!
****************************************मधुकर ************
31/08/2017
शनिवार, 13 मई 2017
बुधवार, 15 फ़रवरी 2017
बुधवार, 14 दिसंबर 2016
नमन हे ! अमर शहीद विकास ||
नमन हे !अमर शहीद विकास !
रामचन्द्र मिश्र “मधुकर”|
नयन ज्योति मिथिला जननी के ,भारत माँ केर हृदय प्रकाश !
नमन हे ! अमर शहीद विकास ||
जीवन पथ कर्तव्य चुनल जे देशक सेवा |
राष्ट्रक सीमा घुसपैठी आतंकी रोकब |
देश प्रवेश करय पाबय नहि ओ नापाकी ,
दुश्मन केर छाती केँ गोली बम सँ ठोकब |
सतत सजगता आतंकी दल केलन्हि सत्यानाश |
नमन हे ! अमर शहीद विकास ||
रहल लड़ैत दिवस निशि रक्षा सीमा केर करैत |
बिछि बिछि के ओ ताकि ताकि के आतंकी मारैत |
देशक रक्षा खातिर राखल तन मन केर नहि ध्यान |
घात लगा के दुश्मन गोली मारल लेलक प्राण |
तैयो जय भारत कहि कहि केँ, छोड़ल अंतिम श्वास |
नमन हे ! अमर शहीद विकास ||
मिथिला वीर सपूत गमाओल ,भारत माँ निज रक्षक लाल |
अमर नाम यश बलिदानी केर ,स्वर्णाक्षर इतिहासक भाल |
धन्य ओ वीर प्रसूता जननी !धन्य धन्य मिथिला के अवणी,
मधुकर धन्य सपूत मैथिलक , धन्य गाम रैयाम प्रकाश |
नमन !हे !अमर शहीद विकास ||
***************मधुकर ****************
14/12/2016
रामचन्द्र मिश्र “मधुकर”|
नयन ज्योति मिथिला जननी के ,भारत माँ केर हृदय प्रकाश !
नमन हे ! अमर शहीद विकास ||
जीवन पथ कर्तव्य चुनल जे देशक सेवा |
राष्ट्रक सीमा घुसपैठी आतंकी रोकब |
देश प्रवेश करय पाबय नहि ओ नापाकी ,
दुश्मन केर छाती केँ गोली बम सँ ठोकब |
सतत सजगता आतंकी दल केलन्हि सत्यानाश |
नमन हे ! अमर शहीद विकास ||
रहल लड़ैत दिवस निशि रक्षा सीमा केर करैत |
बिछि बिछि के ओ ताकि ताकि के आतंकी मारैत |
देशक रक्षा खातिर राखल तन मन केर नहि ध्यान |
घात लगा के दुश्मन गोली मारल लेलक प्राण |
तैयो जय भारत कहि कहि केँ, छोड़ल अंतिम श्वास |
नमन हे ! अमर शहीद विकास ||
मिथिला वीर सपूत गमाओल ,भारत माँ निज रक्षक लाल |
अमर नाम यश बलिदानी केर ,स्वर्णाक्षर इतिहासक भाल |
धन्य ओ वीर प्रसूता जननी !धन्य धन्य मिथिला के अवणी,
मधुकर धन्य सपूत मैथिलक , धन्य गाम रैयाम प्रकाश |
नमन !हे !अमर शहीद विकास ||
***************मधुकर ****************
14/12/2016
शुक्रवार, 18 नवंबर 2016
{ जनगीत } हम मिथिले मे रहबै
तिरहुत नगरिया तेजि कत्तहु ने जेबै, हे! हम मिथिले मे रहबै |
घरे मे हमरा चारू धाम , हे! हम मिथिले मे रहबै ||
जनकक धीया सीया हमरो बहिनियाँ , हे ! हम मिथिले मे रहबै ,
पाहुन हमर सीरी राम , हे ! हम मिथिले मे रहबै |
एहन कोमल भूमि कत्तहु ने पाएब ,हे ! हम मिथिले मे रहबै ,
स्वर्गो सँ सुन्नर हमर गाम , हे ! हम मिथिले मे रहबै |
कमला आ कोशी गंडक नदिया बहै छै हे ! हम मिथिले मे रहबै ,
दक्षिण जग पावन गंगाधार , हे ! हम मिथिले मे रहबै |
फल –फूल अन्न साग अनुपम सुआद्क हे ! हम मिथिले मे रहबै ,
रसगर ओ मिठगर आम लताम , हे ! हम मिथिले मे रहबै |
पान ओ मखान माँछ सरगो ने भेटय हे! हम मिथिले मे रहबै ,
जते बेर जन्म होय मिथिले मे जनमी हे !हम मिथिले मे रहबै ,
‘मधुकर’ ई मिथिला ललाम , हे ! हम मिथिले मे रहबै ||
**********************मधुकर ********************************
2/11/2016
घरे मे हमरा चारू धाम , हे! हम मिथिले मे रहबै ||
जनकक धीया सीया हमरो बहिनियाँ , हे ! हम मिथिले मे रहबै ,
पाहुन हमर सीरी राम , हे ! हम मिथिले मे रहबै |
एहन कोमल भूमि कत्तहु ने पाएब ,हे ! हम मिथिले मे रहबै ,
स्वर्गो सँ सुन्नर हमर गाम , हे ! हम मिथिले मे रहबै |
कमला आ कोशी गंडक नदिया बहै छै हे ! हम मिथिले मे रहबै ,
दक्षिण जग पावन गंगाधार , हे ! हम मिथिले मे रहबै |
फल –फूल अन्न साग अनुपम सुआद्क हे ! हम मिथिले मे रहबै ,
रसगर ओ मिठगर आम लताम , हे ! हम मिथिले मे रहबै |
पान ओ मखान माँछ सरगो ने भेटय हे! हम मिथिले मे रहबै ,
जते बेर जन्म होय मिथिले मे जनमी हे !हम मिथिले मे रहबै ,
‘मधुकर’ ई मिथिला ललाम , हे ! हम मिथिले मे रहबै ||
**********************मधुकर ********************************
2/11/2016
शुक्रवार, 4 नवंबर 2016
सामयिक प्रसंग
&&मिथिलाक छठिव्रत -नहाय खाय आ खरना विधान&&
चौठ सँ भऽ प्रारम्भ सप्तमी तिथि तक, छठि व्रत करब नियम |
लोक आस्था केर पावनि ई ,श्रद्धा भाव भक्ति अनुपम ||
चौठ- नहाय –खाए के विधि अछि ,परम्पराक करब पालन |
मिथिला के घर घर ई पावनि, विधि वत नियमक अनुपालन ||
लोक आस्था केर पावनि ई ,श्रद्धा भाव भक्ति अनुपम ||
चौठ- नहाय –खाए के विधि अछि ,परम्पराक करब पालन |
मिथिला के घर घर ई पावनि, विधि वत नियमक अनुपालन ||
चौठ - नहाय -खाय -----
खरना सँ पहिनेँ चौठक तिथि ,नदी स्नान निरामिष खाए |
ली संकल्प आराधन हेतुक , देहु मनोरथ माए पुराय ||
व्रती राति मे भूमि शयन कर ,पूर्ति हेतु मन के मनकाम |
गाबय गीत सुनय जाग्रत मन , रहय लैत षष्ठी के नाम ||
अरवा भात दालि खेरही के , सजमनि के सादा तरकारी |
सादा सादी हो पवित्रता , उपजल अपना बारी झारी |
पंचमी - खरना ----------
अरवा चौर दूध हो गाएक ,कुसियारक रस टटका गूर |
अति पवित्र माँटिक चुलहा हो , गाएक गोबर चौका पूर ||
माँटि वा पित्तरि के वासन हो, गीत गाबि केँ रान्ही खीर |
जारनि सेहो पवित्र काठ के , धोल पखारल पावन नीर |
षष्ठी सूर्यक कए आराधन, भक्तिभाव नैवेद्यक अर्पण|
जतबा सम्भव हो , मधुर फल, भक्ति भाव सँ करी समर्पण ||
भोग लगा षष्ठी दिनकर केँ, करी प्रसादक वितरण |
आस्था सँ जे करय नेम व्रत , हो सभ कष्ट निवारण |
ई विधि नेम व्रती कर केवल , आन ने क्यो छूबय छाबय |
खीर मधुर पकमान मधुर फल , भक्ति सँ भोग लगाबय |
शुचि आचार विधि नियमक पालन , भाव ने कुत्सित मन आबय |
ओ षष्ठी देवी के संगे ,मधुकर कृपा दिनकरक पाबय ||
**********************मधुकर *********************
खरना सँ पहिनेँ चौठक तिथि ,नदी स्नान निरामिष खाए |
ली संकल्प आराधन हेतुक , देहु मनोरथ माए पुराय ||
व्रती राति मे भूमि शयन कर ,पूर्ति हेतु मन के मनकाम |
गाबय गीत सुनय जाग्रत मन , रहय लैत षष्ठी के नाम ||
अरवा भात दालि खेरही के , सजमनि के सादा तरकारी |
सादा सादी हो पवित्रता , उपजल अपना बारी झारी |
पंचमी - खरना ----------
अरवा चौर दूध हो गाएक ,कुसियारक रस टटका गूर |
अति पवित्र माँटिक चुलहा हो , गाएक गोबर चौका पूर ||
माँटि वा पित्तरि के वासन हो, गीत गाबि केँ रान्ही खीर |
जारनि सेहो पवित्र काठ के , धोल पखारल पावन नीर |
षष्ठी सूर्यक कए आराधन, भक्तिभाव नैवेद्यक अर्पण|
जतबा सम्भव हो , मधुर फल, भक्ति भाव सँ करी समर्पण ||
भोग लगा षष्ठी दिनकर केँ, करी प्रसादक वितरण |
आस्था सँ जे करय नेम व्रत , हो सभ कष्ट निवारण |
ई विधि नेम व्रती कर केवल , आन ने क्यो छूबय छाबय |
खीर मधुर पकमान मधुर फल , भक्ति सँ भोग लगाबय |
शुचि आचार विधि नियमक पालन , भाव ने कुत्सित मन आबय |
ओ षष्ठी देवी के संगे ,मधुकर कृपा दिनकरक पाबय ||
**********************मधुकर *********************
4/11/2016
शनिवार, 29 अक्टूबर 2016
[दीयाबातीक पूर्व संध्या पर ] *** दीपोत्सव गीत ***
[दीयाबातीक पूर्व संध्या पर ]
*** दीपोत्सव गीत ***
स्वागत मिथिला मे दीपोत्सव |
पावस बरसि गेल धरती पर ,काह कूह भसिआएल
हरियर तरु केर डारि पात ,जल विन्दुक धार धोआएल ;
टुस्सा हुलकी देलक नव नव |
स्वागत धरती पर दीपोत्सव ||
कादो थाल निपात बाट सरियाम भेल तृण छीलल ,
घर आँगन लेबल मूनल चिक्क्न चुनमुन हँसु खलखल ;
ढौरल चिकनी माँटि सँ अभिनव |
स्वागत मिथिला मे दीपोत्सव ||
धन तेरस कए स्वच्छ्ताक अभियानक सेना साजल ,
कालराति अन्हार अंत लय दीप मालिका बारल ;
कोना कानी अग जग जगमग |
स्वागत मिथिला मे दीपोत्सव ||
आगत अगहन मास सभक हित शुभ समृद्धि प्रदायक ,
मंगल मूरति लक्ष्मी पूजा जे दीनता विदारक ;
मनबथि तेँ सभ मंगल उत्सव|
स्वागत मिथिला मे दीपोत्सव ||
घर घर ज्ञान प्रकाश प्रकाशित सभतरि लक्ष्मी अन धन ,
सोना चानी कोना कानी आधि बेयाधि ने केहुखन ;
आबओ सुख समृद्धि ओ वैभव |
स्वागत मिथिला मे दीपोत्सव ||
*** दीपोत्सव गीत ***
स्वागत मिथिला मे दीपोत्सव |
पावस बरसि गेल धरती पर ,काह कूह भसिआएल
हरियर तरु केर डारि पात ,जल विन्दुक धार धोआएल ;
टुस्सा हुलकी देलक नव नव |
स्वागत धरती पर दीपोत्सव ||
कादो थाल निपात बाट सरियाम भेल तृण छीलल ,
घर आँगन लेबल मूनल चिक्क्न चुनमुन हँसु खलखल ;
ढौरल चिकनी माँटि सँ अभिनव |
स्वागत मिथिला मे दीपोत्सव ||
धन तेरस कए स्वच्छ्ताक अभियानक सेना साजल ,
कालराति अन्हार अंत लय दीप मालिका बारल ;
कोना कानी अग जग जगमग |
स्वागत मिथिला मे दीपोत्सव ||
आगत अगहन मास सभक हित शुभ समृद्धि प्रदायक ,
मंगल मूरति लक्ष्मी पूजा जे दीनता विदारक ;
मनबथि तेँ सभ मंगल उत्सव|
स्वागत मिथिला मे दीपोत्सव ||
घर घर ज्ञान प्रकाश प्रकाशित सभतरि लक्ष्मी अन धन ,
सोना चानी कोना कानी आधि बेयाधि ने केहुखन ;
आबओ सुख समृद्धि ओ वैभव |
स्वागत मिथिला मे दीपोत्सव ||
‘मधुकर’
29/10/2016
गुरुवार, 27 अक्टूबर 2016
वाह–वाह!जाह-जाह
|| वाह–वाह!जाह-जाह ||
देब तँ वाह –वाह ,लेब तँ जाह –जाह |
भोज तँ वाह –वाह , ओज तँ जाह –जाह |
लोभ तँ वाह –वाह, क्षोभ तँ जाह- जाह |
दाव तँ वाह –वाह , घाव तँ जाह- जाह |
कहब तँ वाह –वाह ,सुनब तँ जाह-जाह |
उठब तँ वाह-वाह ,खसब तँ जाह- जाह |
जुटब तँ वाह वाह , टूटब तँ जाह-जाह |
सटब तँ वाह-वाह, हटब तँ जाह- जाह |
दौड्ब तँ वाह –वाह , खसब तँ जाह- जाह |
जीतब तँ वाह –वाह ,हारब तँ जाह-जाह |
हँसब तँ वाह –वाह , कानब तँ जाह –जाह |
लड़ब तँ वाह-वाह ,हारब तँ जाह –जाह |
आमद तँ वाह-वाह ,खर्चा तँ जाह –जाह |
प्रशंसा तँ वाह- वाह , निंदा तँ जाह- जाह |
पकडल तँ वाह –वाह ,छूटल तँ जाह –जाह |
समटल तँ वाह- वाह ,छीटल तँ जाह –जाह |
सुख मे तँ वाह-वाह ,दुःख मे तँ जाह- जाह ||
जानब तँ वाह- वाह ,बिसरब तँ जाह- जाह |
छूटब तँ वाह –वाह, लसकब तँ जाह –जाह |
‘मधुकर’कह वाह वाह, सुनल तँ वाह वाह ? ,
जीवित मे आह –आह !, मुइला पर वाह वाह !
देब तँ वाह –वाह ,लेब तँ जाह –जाह |
भोज तँ वाह –वाह , ओज तँ जाह –जाह |
लोभ तँ वाह –वाह, क्षोभ तँ जाह- जाह |
दाव तँ वाह –वाह , घाव तँ जाह- जाह |
कहब तँ वाह –वाह ,सुनब तँ जाह-जाह |
उठब तँ वाह-वाह ,खसब तँ जाह- जाह |
जुटब तँ वाह वाह , टूटब तँ जाह-जाह |
सटब तँ वाह-वाह, हटब तँ जाह- जाह |
दौड्ब तँ वाह –वाह , खसब तँ जाह- जाह |
जीतब तँ वाह –वाह ,हारब तँ जाह-जाह |
हँसब तँ वाह –वाह , कानब तँ जाह –जाह |
लड़ब तँ वाह-वाह ,हारब तँ जाह –जाह |
आमद तँ वाह-वाह ,खर्चा तँ जाह –जाह |
प्रशंसा तँ वाह- वाह , निंदा तँ जाह- जाह |
पकडल तँ वाह –वाह ,छूटल तँ जाह –जाह |
समटल तँ वाह- वाह ,छीटल तँ जाह –जाह |
सुख मे तँ वाह-वाह ,दुःख मे तँ जाह- जाह ||
जानब तँ वाह- वाह ,बिसरब तँ जाह- जाह |
छूटब तँ वाह –वाह, लसकब तँ जाह –जाह |
‘मधुकर’कह वाह वाह, सुनल तँ वाह वाह ? ,
जीवित मे आह –आह !, मुइला पर वाह वाह !
------ मधुकर ---
बुधवार, 26 अक्टूबर 2016
अमृत आ विष
|| अमृत आ विष ||
अमृत थिक सौन्दर्यक दर्शन , अमृत अनुपम क्षीरक भोजन |
अमृत निशि केर चन्द्र किरण सन ,शान्ति सुखद अमृतमय जीवन ||
अमृत शैत्य मे अग्निक सेवन , अमृत थिक सम्मानक भाजन |
अमृत थिक निरोग हो तन मन , अमृत विद्या ज्ञानक अर्जन ||
अमृत थिक मायाक विसर्जन , अमृत थिक गायन मन रंजन |
अमृतमय मधुभाव अंकुरण , अमृत थिक संतोष महाधन |
अमृतमय थिक पोषण गोधन ,अमृतमय शीतल जल पावन ||
शुभ बिचार अमृत अनुमोदन ,असली सुधा पवन मृदु जीवन |
अमृतमय थिक सात्विक भोजन ,अमृतमय थिक ईष्ट्क कीर्त्तन ||
भोजन वस्त्र आबास विलक्षण ,अमृत मातृभूमि के सेवन |
आह कहय मुइलो पर जनगण ,मधुकर अमर- अमृतमय जीवन ||
||विष ||
विष थिक बुत्ता अधिक होएब तन ,आवश्यक सँ अधिक हएब धन |
विष थिक भूखक अनुभव अनुखन , विष हिंसा कए जीवक भक्षण ||
विष थिक अति आलस्य होएब तन , अधिक महत्वाकांक्षा पोषण |
विष थिक संशय सभ मे अनुखन ,विष थिक अति दुर्ब्यसनक सेवन ||
विष थिक स्वार्थे मिथ्या भाषण ,विष थिक शील विवेकक त्यागन ||
विष थिक बनब घृणा के भाजन, विष थिक सतत कुसंग निर्वहन |
विष थिक हिंसा रत हो जीवन , विष थिक निर्वल जन केर मर्दन ||
विष थिक भ्रष्टाचार आचरण ,विष थिक खाएब आनक अर्जन |
विष यदि नहि आत्मा परिमार्जन ,विष थिक सज्जन मानक भंजन ||
विष थिक अतिशय प्रेमक बर्द्धन , विष थिक क्षणे क्षणे परिवर्त्तन |
उचितक त्याग विषम- विष ‘मधुकर’ विषमय जीवन केर सभ लक्षण ||
*******************मधुकर *******************************
26/10/2016
अमृत थिक सौन्दर्यक दर्शन , अमृत अनुपम क्षीरक भोजन |
अमृत निशि केर चन्द्र किरण सन ,शान्ति सुखद अमृतमय जीवन ||
अमृत शैत्य मे अग्निक सेवन , अमृत थिक सम्मानक भाजन |
अमृत थिक निरोग हो तन मन , अमृत विद्या ज्ञानक अर्जन ||
अमृत थिक मायाक विसर्जन , अमृत थिक गायन मन रंजन |
अमृतमय मधुभाव अंकुरण , अमृत थिक संतोष महाधन |
अमृतमय थिक पोषण गोधन ,अमृतमय शीतल जल पावन ||
शुभ बिचार अमृत अनुमोदन ,असली सुधा पवन मृदु जीवन |
अमृतमय थिक सात्विक भोजन ,अमृतमय थिक ईष्ट्क कीर्त्तन ||
भोजन वस्त्र आबास विलक्षण ,अमृत मातृभूमि के सेवन |
आह कहय मुइलो पर जनगण ,मधुकर अमर- अमृतमय जीवन ||
||विष ||
विष थिक बुत्ता अधिक होएब तन ,आवश्यक सँ अधिक हएब धन |
विष थिक भूखक अनुभव अनुखन , विष हिंसा कए जीवक भक्षण ||
विष थिक अति आलस्य होएब तन , अधिक महत्वाकांक्षा पोषण |
विष थिक संशय सभ मे अनुखन ,विष थिक अति दुर्ब्यसनक सेवन ||
विष थिक स्वार्थे मिथ्या भाषण ,विष थिक शील विवेकक त्यागन ||
विष थिक बनब घृणा के भाजन, विष थिक सतत कुसंग निर्वहन |
विष थिक हिंसा रत हो जीवन , विष थिक निर्वल जन केर मर्दन ||
विष थिक भ्रष्टाचार आचरण ,विष थिक खाएब आनक अर्जन |
विष यदि नहि आत्मा परिमार्जन ,विष थिक सज्जन मानक भंजन ||
विष थिक अतिशय प्रेमक बर्द्धन , विष थिक क्षणे क्षणे परिवर्त्तन |
उचितक त्याग विषम- विष ‘मधुकर’ विषमय जीवन केर सभ लक्षण ||
*******************मधुकर *******************************
26/10/2016
मैथिल तैयो अनठौने छी
|| मैथिल तैयो अनठौने छी||
गाम बूड़ल –धाम बूड़ल, मिथिला के नाम बूड़ल ,
संस्कृति संस्कार बुड़ल ,तैयो अनठौने छी ?
एत्तहि के नृप विदेह ,पुत्री रमा सदेह ,
ब्रह्म राम पाबि नेह ,मानल मिथिला श्वगेह ;
मैथिल सन्तान हुनक, नाम निज घिनौने छी |
पूर्वज के ज्ञान ध्यान ,साक्षी तेहि केर पुराण ,
मानवता देल त्रान ,जीवन दर्शन महान ,
हुनके छी प्रजा पुत्र ,माथ निज नुकौने छी ||
क्षण पल छी जैत गलल ,मिथिला नहि राज्य बनल ,
अवसर छल सेहो हुसल ,क्षमता नुकौने छी |
करबा लय क्रांति प्रवल ,नहि छी सभ मिलल जुलल ,
फुटकल छी जाति पाति ,काल निज गमौने छी |
कत्तहु अतिशय सुखार ,कत्तहु पैनिक अमार ,
पूर्वज के ज्ञान ध्यान ,साक्षी तेहि केर पुराण ,
मानवता देल त्रान ,जीवन दर्शन महान ,
हुनके छी प्रजा पुत्र ,माथ निज नुकौने छी ||
क्षण पल छी जैत गलल ,मिथिला नहि राज्य बनल ,
अवसर छल सेहो हुसल ,क्षमता नुकौने छी |
करबा लय क्रांति प्रवल ,नहि छी सभ मिलल जुलल ,
फुटकल छी जाति पाति ,काल निज गमौने छी |
कत्तहु अतिशय सुखार ,कत्तहु पैनिक अमार ,
बूडल खेती पथार ,अन्न पैन घर द्वार कोशी कमलाक धार, सभटा भसियौंने छी |
मातृभूमि बिलटि रहल ,वैभव सभ निघटि रहल ,
स्वर बिरोध चपटि रहल ,निर्वल बुझि डपटि रहल ,
अपने मे झंझ मंझ ,शक्ति सभ गमौने छी |
सूतल जे जाति रहय. सभटा चुप चाप सहय ,
बखरा लय नहि लड़य ,बनि नीरीह त्याग करय ,
‘मधुकर’ निज स्वाभिमान ,मैथिल मटियौने छी |
***********************मधुकर ***********************
मातृभूमि बिलटि रहल ,वैभव सभ निघटि रहल ,
स्वर बिरोध चपटि रहल ,निर्वल बुझि डपटि रहल ,
अपने मे झंझ मंझ ,शक्ति सभ गमौने छी |
सूतल जे जाति रहय. सभटा चुप चाप सहय ,
बखरा लय नहि लड़य ,बनि नीरीह त्याग करय ,
‘मधुकर’ निज स्वाभिमान ,मैथिल मटियौने छी |
***********************मधुकर ***********************
मंगलवार, 25 अक्टूबर 2016
नेना केँ नहि दुत्कारू
|| नेना केँ नहि दुत्कारू ||
नेना केँ नहि दुत्कारू नहि फटकारू |
हूसय लागय पैर तँ ओकरा ,हाथ पकरि के समहारू |
यिग्यासा के उत्तर दीयऽ ने झझकारू टिटकारू ,
ओकर भविष्यक सपना ,जतबा हो सम्भव साकारू |
प्रतिभा प्रोत्साहित करबा लय बाज़ी लगा लगा हारू ,
अधहो बात कहय तँ कहि के आधा अपनेँ स्वीकारू |
अंट संट नेना भुटका केँ कहि नहि नाम उचारू |.
बुच्ची नूनू बच्चा कहि –कहि कए दुलार पुचकारू |
इहो नीक नहि बात ओकर हित बहसि के बनय दुलारू |
किन्तु ने अनुभव करय उपेक्षा , अनुखन सेहो बिचारू |
अपन नेनपन की चाहै छल सेहो बात अहाँ मन पारू |
छोट छीन गलती केला पर ,नहि घेथारि हुथकारू |
करय यदी ओ अनुचित ईच्छा रोकू बुझा ने मारू |
अँह परिवार समाज राष्ट्र के कर्णधार छी मन्त्र उचारू ||
कथा पिहानी कहि कहि ज्ञानक मोन ओकर बहटारू |
रहू ठोकैत पीठ के मधुकर ,दुरदुराय नहि ओकरा टारू ||
प्रतिभा प्रोत्साहित करबा लय बाज़ी लगा लगा हारू ,
अधहो बात कहय तँ कहि के आधा अपनेँ स्वीकारू |
अंट संट नेना भुटका केँ कहि नहि नाम उचारू |.
बुच्ची नूनू बच्चा कहि –कहि कए दुलार पुचकारू |
इहो नीक नहि बात ओकर हित बहसि के बनय दुलारू |
किन्तु ने अनुभव करय उपेक्षा , अनुखन सेहो बिचारू |
अपन नेनपन की चाहै छल सेहो बात अहाँ मन पारू |
छोट छीन गलती केला पर ,नहि घेथारि हुथकारू |
करय यदी ओ अनुचित ईच्छा रोकू बुझा ने मारू |
अँह परिवार समाज राष्ट्र के कर्णधार छी मन्त्र उचारू ||
कथा पिहानी कहि कहि ज्ञानक मोन ओकर बहटारू |
रहू ठोकैत पीठ के मधुकर ,दुरदुराय नहि ओकरा टारू ||
***************मधुकर **********************
सदस्यता लें
संदेश (Atom)


