मैथिली साहित्य महासभाक एहि ब्लॉग पर अपनेक स्वागत अछि। मैसाम मैथिली साहित्यक संवर्धन ओ संरक्षण लेल संकल्पित अछि। अपन कोनो तरहक रचना / सुझाव maithilisahityamahasabha@gmail.com पर पठा सकैत छी। एहि ब्लॉग के subscribe करब नहि बिसरब, जाहि सँ समस्त आलेख पोस्ट होएबाक जानकारी अपने लोकनि के भेटैत रहत। संपर्क सूत्र : 8010218022, 9810099451

मंगलवार, 26 सितंबर 2017

उपासना

कल्पना झा ★
एकटा छथि,
माँ जगजननी महाकाली !
सभक रक्षनार्थ,
दुखिया के दुःखहारिणी
पालनकारिणि महागौड़ी
के नहि जनैछ हिनक महिमा..
माँ जगदम्बा !
तें की ?
ओहो त स्त्रिये छथि ..
ओ त भवभंजनि महाकालिका थिकीह
हम सभ हुनका अबला कहबनि !
नहि ने ?
हुनक जीबन कि अकंटक छलन्हि ?
साक्षात् रणचण्डी। !
त की ?
हम सभ सदति ..
कथमपि नहिं .
आख्यान ब्याख्यान भरल परल अछि ,
पूजा अर्चना क संग ...
हुनक कंटकमय गाथा सँ ..
जीबन जिबाक प्रेरणा लैत छी ।
हुनक कंटकमय गाथाक ...
श्रवण मनन करैत छी ।
तअ कहू त कियेक नहि ..
हुनकहि सँ ..
एहि बातक बिचार केने बिना
कियेक कनियों दुःख सँ ..
अति दुःखी भए ...
अपन आराध्या क आगू ...
गिरगिराइत रहैत छी ,
जे ओ अपराजिता ..
महाकाली माए
कतेक द्रवित हेतीह ..
हमर सभक अकर्मण्यता पर ,
तअ आऊ ..
कतेक क्षुब्ध हेतीह ,
पूजा उपासना क
हम सभ मिलि प्रण करी
जानबा , बुझबाक ...

अनर्गल अर्थ जानि ,
पूजा उपासना क सही अर्थ


गुरुवार, 21 सितंबर 2017

कलशस्थापन

शुभ संकल्पक कलशस्थापन !
तन केर घट मे ज्ञानक जल दय , उत्कर्षक अभिनव पल्लव दय ,
विजयक जव केँ कर्म वालुका ,धी विद्या संग मे आरोपण |
शुभ संकल्पक कलशस्थापन ||
सदाचार केर द्रव्य समर्पित ,शुभ विचार के फल कय अर्पित ,
लालित्यक हो वस्त्र आवरण ,एकताक माला हो गुम्फन |
शुभ संकल्पक कलशस्थापन ||
सुभग मन्त्र कर्मक उत्प्रेरण ,प्राणी केर प्रकाशमय जीवन ,
सुख संतोष प्राप्त हो अनुखन ,दीपक ज्योति विकास किरण |
शुभ संकल्पक कलशस्थापन ||
करुणा कृपा आ त्याग भावना ,अपना लय अत्यल्प कामना ,
पर सुख जनहित केर कल्पना ,अनुरागक हो भाव प्रदर्शन |
शुभ संकल्पक कलशस्थापन ||
ममतामयि माताक मूर्ति हो ,सुभग याचना केर पूर्ति हो,
जीवन रण विजयक स्फूर्ति हो ,मंगल मोदक शरण वरण |
शुभ संकल्पक कलशस्थापन ||
मानस उपजय हीन भाव नहि,अशुभ अमंगल केर प्रभाव नहि,
सत्य अहिंसा सँ दुराव नहि ,शक्ति युक्तिमय मानव जीवन |
शुभ संकल्पक कलशस्थापन ||
स्वाहा भ्रष्टाचार हवन कए, नारी मातृस्वरूप नमन कए ,
करू स्तवन शक्तिक मधुकर ,आत्मभाव जीवक प्रतिपालन |
शुभ संकल्पक कलशस्थापन ||
*******************मधुकर **************

सोमवार, 11 सितंबर 2017

देव्यपराधक्षमापन स्तोत्रम् क छायानुवाद

श्री राम चन्द्र मिश्र "मधुकर"

माँ जगदम्वे चरण शरण |
मन्त्र ने जानी तन्त्र ने जानी ,नहि स्तुति करबा के ज्ञान ,
नहि जानी हम करब आवाहन ,नहि अवगति करबा के ध्यान |
हम अहाँक स्तोत्र कथा सँ, मातु सर्वथा छी अनजान ;

नहि मुद्रा सँ हमरा परिचय , केवल करब विलापक ज्ञान |

हम तँ बात एकेटा जानी , ग्रहण जे जननी करय शरण |

माँ जगदम्वे चरण शरण ||
कल्याणी उद्धार कारिणी ,नहि विधान पूजा धारण |
,धनक अभाव स्वभाव आलसी ,कएल ने पाठक सम्पादन |
त्रुटि भेल चरणक सेवा मे ,क्षमा करब हे जग जननी !
पूत कपूत बनब सम्भव अछि ,मात कुमाता नहि केहुखन ?
माँ जगदम्वे चरण शरण ||
पुत्र अहाँके सरल स्वभावक ,पृथ्वी पर बहुतो जग जननी !
हम छी चपल स्वभावक चंचल ,विरल पुत्र हम छी अवणी,
किन्तु त्याग नहि हमर उचित अछि ,नहि जानी एहि केर कारण ?
पूत कपूत बनब सम्भव अछि ,मात कुमाता नहि केहुखन |
माँ जगदम्वे !चरण शरण ||
चरणक सेवा कएल ने कहियो ,नहि धन केलहुँ हम अर्पण ,
स्नेह अहाँ के तद्यपि अनुपम, हम जानी एहि के कारण ,
पुत्र अधम पर स्नेह ममत्वक ,अहाँ कएल निश्चय धारण ,
पूत कपूत बनब सम्भव अछि ,मात कुमाता नहि केहुखन |
माँ जगदम्वे चरण शरण ||
मातु पार्वती हम तँ केलहुँ ,अछि माँ अनेक देवक सेवन ,
वर्ष पचासी आब ने सम्भव ,हमरा सँ सबहक पूजन ?
रहल आश नहि हमरा ककरो, तेँ धेलहुँ अछि अहँक शरण ,
अहूँ कृपा नहि करब हे अम्वे! तँ जाएब पुनि ककर शरण ?
माँ जगदम्वे चरण शरण ||
अहँक मन्त्र केर एको अक्षर ,अधम सँ अधमक कान समाय ,
तँ चांडालो केर मुख निकसय ,वाणी मधुरक उच्चारण ,
दीनो पाबि लैत अछि वैभव ,मंत्राक्षर जे करय श्रवण ,
जप तप अहँक करय विधि पूर्वक ,गति मति प्राप्त विलक्षण |
माँ जगदम्वे चरण शरण ||
अंग लपेटल चिता भस्म छन्हि ,विषम हलाहल अछि भोजन ,
नग्न दिगम्बर माथ जटा छन्हि ,कंठ वासुकी आभूषण ,
भिक्षा पात्र कपाल हाथ मे, जगदीशक पदवी धारण ,
ई महत्व शिव केँ अछि भेटल , अहींक पाणिग्रहणक कारण |
माँ जगदम्वे चरण शरण ||
चन्द्रमुखी हम सत्य कहै छी ,नहि हमरा मोक्षक ईच्छा ,
नहि अभिलाषा आब जगत मे,प्राप्त करी हम वैभव धन ,
नहि विज्ञानक ज्ञान अपेक्षा , नहि सुख भोगक आकांक्षा ,
हमर याचना मातु एकेटा ,नाम जपैत रही जीवन |
माँ जगदम्वे चरण शरण || 
माँ श्यामा हम विधि पूर्वक नहि ,कएल अहाँ के आराधन ,
हम केलहुँ अपराध अनेको , हृदय कठोर भाव चिन्तन ,
किंचित कृपा दृष्टि हमरा पर, प्राप्त अहाँ के अवलम्वन,
दयामयी ई अहींक योग्य अछि ,अपन कुपुत्रो देब शरण |
माँ जगदम्वे चरण शरण ||
हे महेश्वरी ! करुणा सागर ,आफद फँसि केलहुँ सुमिरण ,
शठता हमर क्षमा करु जननी , नहि केलहुँ पद के सेवन ,
ब्यर्थ गमाएल काल स्मरण ,केलहुँ नहि हम भरि जीवन ,
भूखल प्यासें पीड़ीत बालक करय मात्र माएक सुमिरन |
माँ जगदम्वे चरण शरण ||
तद्यपि कृपा अहाँ के पाबी ,नहि कोनो आश्चर्यक बात ?
पुत्र करय अपराध घनेरो ,तदपि उपेक्षा करथि ने मात ,
हमर समान पातकी जग नहि ,पाप हारिणी नहि अहाँ सन ,
उचित बुझी से करी हे अम्वे ! हम मधुकर छी मातृ शरण |
माँ जगदम्वे ! चरण शरण ||

*****************मधुकर **************************


शुक्रवार, 1 सितंबर 2017

बिना

डेग झारि नहि चलब बाट मे ठेसो लगनेँ |
पैर वारि नहि धरब मार्ग मे काँटो गरनेँ |
आबो नहि सम्हरब दुश्मन के वैभव हरणेँ |
आनक उन्नति देखि कोनो फल नहि हो जरनेँ |
युक्ति बिना नहि कार्य सिद्ध कतबो श्रम कएनेँ |
प्राप्त सफलता नहि हो , लगन धैर्य बिनु धएनेँ |
पेट भरय नहि रस लागल आँगुर केँ चटनेँ |
भेटय शान्ति संतोष बाँटि केँ हिस्सा खेनेँ |
मोजर भेटय ने गौरव गीत अपन मुँह गेनेँ |
सुनियों केँ अन्ठाबय, हरदम गाल बजेनेँ |
बिनु साहस के युद्ध विजय नहि खड्ग पिजेनेँ |
चौर बनय नहि भात पैन बिनु आगि सिझेनेँ |
सहन शक्ति नहि बिना क्रोध के आगि मिझेनेँ |
प्रेम होए नहि बात बिचार सँ बिना रिझेनेँ |
नहि श्रद्धा विश्वास बिना आत्मा सुनझेनेँ ||
************************मधुकर *************

01/09/2017

गुरुवार, 31 अगस्त 2017

मुनब आँखि जगत अन्हारे

मुनब आँखि जगत अन्हारे , चिन्हत लोक अँहक व्यवहारे |
मति गति हो आहार विहारे , कीर्ति करब जानत संसारे |
दोषी अनुचित कए ब्यापारे , सत्कर्मी केर सुयश अपारे |
प्रिय लगैत अछि सुखद बिचारे , नाङट रहब देखत संसारे |
घृणा पाएब मानसिक विकारे , जोश होश आबय ललकारे |
मान भेटत कए जन सत्कारे , किछुओ टिकय ने बिनु आधारे |
होए ने प्रतिक्रिया बिना प्रहारे , जिह्वा स्वाद ने बिनु चटकारे |
नेना रीझय ने बिना दुलारे , थेथर हटय ने बिनु दुत्कारे ||
खुशामदो नहि बिनु दरकारे , आमद प्राप्त हो कोनो प्रकारे |
सिद्ध दोष नहि बिनु स्वीकारे , भेटय प्रमाण तँ बंद वकारे ||
बुद्धिक बल बल सकल पछारे , छुरी बुधियार दूनू दिस धारे |
सभ दिन माथा पापक भारे , मधुकर अंतमे हरे मुरारे!
****************************************मधुकर ************

31/08/2017

बुधवार, 14 दिसंबर 2016

नमन हे ! अमर शहीद विकास ||

नमन हे !अमर शहीद विकास !
रामचन्द्र मिश्र “मधुकर”|
नयन ज्योति मिथिला जननी के ,भारत माँ केर हृदय प्रकाश !
नमन हे ! अमर शहीद विकास ||
जीवन पथ कर्तव्य चुनल जे देशक सेवा |
राष्ट्रक सीमा घुसपैठी आतंकी रोकब |
देश प्रवेश करय पाबय नहि ओ नापाकी ,
दुश्मन केर छाती केँ गोली बम सँ ठोकब |
सतत सजगता आतंकी दल केलन्हि सत्यानाश |
नमन हे ! अमर शहीद विकास ||
रहल लड़ैत दिवस निशि रक्षा सीमा केर करैत |
बिछि बिछि के ओ ताकि ताकि के आतंकी मारैत |
देशक रक्षा खातिर राखल तन मन केर नहि ध्यान |
घात लगा के दुश्मन गोली मारल लेलक प्राण |
तैयो जय भारत कहि कहि केँ, छोड़ल अंतिम श्वास |
नमन हे ! अमर शहीद विकास ||
मिथिला वीर सपूत गमाओल ,भारत माँ निज रक्षक लाल |
अमर नाम यश बलिदानी केर ,स्वर्णाक्षर इतिहासक भाल |
धन्य ओ वीर प्रसूता जननी !धन्य धन्य मिथिला के अवणी,
मधुकर धन्य सपूत मैथिलक , धन्य गाम रैयाम प्रकाश |
नमन !हे !अमर शहीद विकास ||
***************मधुकर ****************

14/12/2016

शुक्रवार, 18 नवंबर 2016

{ जनगीत } हम मिथिले मे रहबै

तिरहुत नगरिया तेजि कत्तहु ने जेबै, हे! हम मिथिले मे रहबै |
घरे मे हमरा चारू धाम , हे! हम मिथिले मे रहबै ||
जनकक धीया सीया हमरो बहिनियाँ , हे ! हम मिथिले मे रहबै ,
पाहुन हमर सीरी राम , हे ! हम मिथिले मे रहबै |
एहन कोमल भूमि कत्तहु ने पाएब ,हे ! हम मिथिले मे रहबै ,
स्वर्गो सँ सुन्नर हमर गाम , हे ! हम मिथिले मे रहबै |
कमला आ कोशी गंडक नदिया बहै छै हे ! हम मिथिले मे रहबै ,
दक्षिण जग पावन गंगाधार , हे ! हम मिथिले मे रहबै |
फल –फूल अन्न साग अनुपम सुआद्क हे ! हम मिथिले मे रहबै ,
रसगर ओ मिठगर आम लताम , हे ! हम मिथिले मे रहबै |
पान ओ मखान माँछ सरगो ने भेटय हे! हम मिथिले मे रहबै ,
जते बेर जन्म होय मिथिले मे जनमी हे !हम मिथिले मे रहबै ,
‘मधुकर’ ई मिथिला ललाम , हे ! हम मिथिले मे रहबै ||
**********************मधुकर ********************************

2/11/2016

शुक्रवार, 4 नवंबर 2016

सामयिक प्रसंग


&&मिथिलाक छठिव्रत -नहाय खाय आ खरना विधान&&
चौठ सँ भऽ प्रारम्भ सप्तमी तिथि तक, छठि व्रत करब नियम |
लोक आस्था केर पावनि ई ,श्रद्धा भाव भक्ति अनुपम ||
चौठ- नहाय –खाए के विधि अछि ,परम्पराक करब पालन |
मिथिला के घर घर ई पावनि, विधि वत नियमक अनुपालन ||
चौठ - नहाय -खाय -----
खरना सँ पहिनेँ चौठक तिथि ,नदी स्नान निरामिष खाए |
ली संकल्प आराधन हेतुक , देहु मनोरथ माए पुराय ||
व्रती राति मे भूमि शयन कर ,पूर्ति हेतु मन के मनकाम |
गाबय गीत सुनय जाग्रत मन , रहय लैत षष्ठी के नाम ||
अरवा भात दालि खेरही के , सजमनि के सादा तरकारी |
सादा सादी हो पवित्रता , उपजल अपना बारी झारी |
पंचमी - खरना ----------
अरवा चौर दूध हो गाएक ,कुसियारक रस टटका गूर |
अति पवित्र माँटिक चुलहा हो , गाएक गोबर चौका पूर ||
माँटि वा पित्तरि के वासन हो, गीत गाबि केँ रान्ही खीर |
जारनि सेहो पवित्र काठ के , धोल पखारल पावन नीर |
षष्ठी सूर्यक कए आराधन, भक्तिभाव नैवेद्यक अर्पण|
जतबा सम्भव हो , मधुर फल, भक्ति भाव सँ करी समर्पण ||
भोग लगा षष्ठी दिनकर केँ, करी प्रसादक वितरण |
आस्था सँ जे करय नेम व्रत , हो सभ कष्ट निवारण |
ई विधि नेम व्रती कर केवल , आन ने क्यो छूबय छाबय |
खीर मधुर पकमान मधुर फल , भक्ति सँ भोग लगाबय |
शुचि आचार विधि नियमक पालन , भाव ने कुत्सित मन आबय |
ओ षष्ठी देवी के संगे ,मधुकर कृपा दिनकरक पाबय ||
**********************मधुकर *********************
4/11/2016

शनिवार, 29 अक्टूबर 2016

[दीयाबातीक पूर्व संध्या पर ] *** दीपोत्सव गीत ***

[दीयाबातीक पूर्व संध्या पर ]
*** दीपोत्सव गीत ***
स्वागत मिथिला मे दीपोत्सव |
पावस बरसि गेल धरती पर ,काह कूह भसिआएल
हरियर तरु केर डारि पात ,जल विन्दुक धार धोआएल ;
टुस्सा हुलकी देलक नव नव |
स्वागत धरती पर दीपोत्सव ||
कादो थाल निपात बाट सरियाम भेल तृण छीलल ,
घर आँगन लेबल मूनल चिक्क्न चुनमुन हँसु खलखल ;
ढौरल चिकनी माँटि सँ अभिनव |
स्वागत मिथिला मे दीपोत्सव ||
धन तेरस कए स्वच्छ्ताक अभियानक सेना साजल ,
कालराति अन्हार अंत लय दीप मालिका बारल ;
कोना कानी अग जग जगमग |
स्वागत मिथिला मे दीपोत्सव ||
आगत अगहन मास सभक हित शुभ समृद्धि प्रदायक ,
मंगल मूरति लक्ष्मी पूजा जे दीनता विदारक ;
मनबथि तेँ सभ मंगल उत्सव|
स्वागत मिथिला मे दीपोत्सव ||
घर घर ज्ञान प्रकाश प्रकाशित सभतरि लक्ष्मी अन धन ,
सोना चानी कोना कानी आधि बेयाधि ने केहुखन ;
आबओ सुख समृद्धि ओ वैभव |
स्वागत मिथिला मे दीपोत्सव ||
‘मधुकर’
29/10/2016

गुरुवार, 27 अक्टूबर 2016

वाह–वाह!जाह-जाह

|| वाह–वाह!जाह-जाह ||

देब तँ वाह –वाह ,लेब तँ जाह –जाह |
भोज तँ वाह –वाह , ओज तँ जाह –जाह |
लोभ तँ वाह –वाह, क्षोभ तँ जाह- जाह |
दाव तँ वाह –वाह , घाव तँ जाह- जाह |
कहब तँ वाह –वाह ,सुनब तँ जाह-जाह |
उठब तँ वाह-वाह ,खसब तँ जाह- जाह |
जुटब तँ वाह वाह , टूटब तँ जाह-जाह |
सटब तँ वाह-वाह, हटब तँ जाह- जाह |
दौड्ब तँ वाह –वाह , खसब तँ जाह- जाह |
जीतब तँ वाह –वाह ,हारब तँ जाह-जाह |
हँसब तँ वाह –वाह , कानब तँ जाह –जाह |
लड़ब तँ वाह-वाह ,हारब तँ जाह –जाह |
आमद तँ वाह-वाह ,खर्चा तँ जाह –जाह |
प्रशंसा तँ वाह- वाह , निंदा तँ जाह- जाह |
पकडल तँ वाह –वाह ,छूटल तँ जाह –जाह |
समटल तँ वाह- वाह ,छीटल तँ जाह –जाह |
सुख मे तँ वाह-वाह ,दुःख मे तँ जाह- जाह ||
जानब तँ वाह- वाह ,बिसरब तँ जाह- जाह |
छूटब तँ वाह –वाह, लसकब तँ जाह –जाह |
‘मधुकर’कह वाह वाह, सुनल तँ वाह वाह ? ,
जीवित मे आह –आह !, मुइला पर वाह वाह !
------ मधुकर ---

बुधवार, 26 अक्टूबर 2016

अमृत आ विष

|| अमृत आ विष ||

अमृत थिक सौन्दर्यक दर्शन , अमृत अनुपम क्षीरक भोजन |
अमृत निशि केर चन्द्र किरण सन ,शान्ति सुखद अमृतमय जीवन ||
अमृत शैत्य मे अग्निक सेवन , अमृत थिक सम्मानक भाजन |
अमृत थिक निरोग हो तन मन , अमृत विद्या ज्ञानक अर्जन || 
अमृत थिक मायाक विसर्जन , अमृत थिक गायन मन रंजन |
अमृतमय मधुभाव अंकुरण , अमृत थिक संतोष महाधन |
अमृतमय थिक पोषण गोधन ,अमृतमय शीतल जल पावन ||
शुभ बिचार अमृत अनुमोदन ,असली सुधा पवन मृदु जीवन |
अमृतमय थिक सात्विक भोजन ,अमृतमय थिक ईष्ट्क कीर्त्तन ||
भोजन वस्त्र आबास विलक्षण ,अमृत मातृभूमि के सेवन |
आह कहय मुइलो पर जनगण ,मधुकर अमर- अमृतमय जीवन ||


             
        ||विष ||

विष थिक बुत्ता अधिक होएब तन ,आवश्यक सँ अधिक हएब धन |
विष थिक भूखक अनुभव अनुखन , विष हिंसा कए जीवक भक्षण ||
विष थिक अति आलस्य होएब तन , अधिक महत्वाकांक्षा पोषण |
विष थिक संशय सभ मे अनुखन ,विष थिक अति दुर्ब्यसनक सेवन ||
विष थिक स्वार्थे मिथ्या भाषण ,विष थिक शील विवेकक त्यागन ||
विष थिक बनब घृणा के भाजन, विष थिक सतत कुसंग निर्वहन |
विष थिक हिंसा रत हो जीवन , विष थिक निर्वल जन केर मर्दन ||
विष थिक भ्रष्टाचार आचरण ,विष थिक खाएब आनक अर्जन |
विष यदि नहि आत्मा परिमार्जन ,विष थिक सज्जन मानक भंजन ||
विष थिक अतिशय प्रेमक बर्द्धन , विष थिक क्षणे क्षणे परिवर्त्तन |
उचितक त्याग विषम- विष ‘मधुकर’ विषमय जीवन केर सभ लक्षण ||
*******************मधुकर *******************************

26/10/2016

मैथिल तैयो अनठौने छी

 || मैथिल तैयो अनठौने छी|| 

गाम बूड़ल –धाम बूड़ल, मिथिला के नाम बूड़ल ,
संस्कृति संस्कार बुड़ल ,तैयो अनठौने छी ?
एत्तहि के नृप विदेह ,पुत्री रमा सदेह ,
ब्रह्म राम पाबि नेह ,मानल मिथिला श्वगेह ;
मैथिल सन्तान हुनक, नाम निज घिनौने छी |
पूर्वज के ज्ञान ध्यान ,साक्षी तेहि केर पुराण ,
मानवता देल त्रान ,जीवन दर्शन महान ,
हुनके छी प्रजा पुत्र ,माथ निज नुकौने छी ||
क्षण पल छी जैत गलल ,मिथिला नहि राज्य बनल ,
अवसर छल सेहो हुसल ,क्षमता नुकौने छी |
करबा लय क्रांति प्रवल ,नहि छी सभ मिलल जुलल ,
फुटकल छी जाति पाति ,काल निज गमौने छी |
कत्तहु अतिशय सुखार ,कत्तहु पैनिक अमार ,
बूडल खेती पथार ,अन्न पैन घर द्वार कोशी कमलाक धार, सभटा भसियौंने छी |
मातृभूमि बिलटि रहल ,वैभव सभ निघटि रहल ,
स्वर बिरोध चपटि रहल ,निर्वल बुझि डपटि रहल ,
अपने मे झंझ मंझ ,शक्ति सभ गमौने छी |
सूतल जे जाति रहय. सभटा चुप चाप सहय ,
बखरा लय नहि लड़य ,बनि नीरीह त्याग करय ,
‘मधुकर’ निज स्वाभिमान ,मैथिल मटियौने छी |
***********************मधुकर ***********************

मंगलवार, 25 अक्टूबर 2016

नेना केँ नहि दुत्कारू

|| नेना केँ नहि दुत्कारू ||

नेना केँ नहि दुत्कारू नहि फटकारू |
हूसय लागय पैर तँ ओकरा ,हाथ पकरि के समहारू |
यिग्यासा के उत्तर दीयऽ ने झझकारू टिटकारू ,
ओकर भविष्यक सपना ,जतबा हो सम्भव साकारू |
प्रतिभा प्रोत्साहित करबा लय बाज़ी लगा लगा हारू ,
अधहो बात कहय तँ कहि के आधा अपनेँ स्वीकारू |
अंट संट नेना भुटका केँ कहि नहि नाम उचारू |.
बुच्ची नूनू बच्चा कहि –कहि कए दुलार पुचकारू |
इहो नीक नहि बात ओकर हित बहसि के बनय दुलारू |
किन्तु ने अनुभव करय उपेक्षा , अनुखन सेहो बिचारू |
अपन नेनपन की चाहै छल सेहो बात अहाँ मन पारू |
छोट छीन गलती केला पर ,नहि घेथारि हुथकारू |
करय यदी ओ अनुचित ईच्छा रोकू बुझा ने मारू |
अँह परिवार समाज राष्ट्र के कर्णधार छी मन्त्र उचारू ||
कथा पिहानी कहि कहि ज्ञानक मोन ओकर बहटारू |
रहू ठोकैत पीठ के मधुकर ,दुरदुराय नहि ओकरा टारू ||
***************मधुकर **********************